परिवार कभी पराया नहीं होता… प्‍यार कभी कम नहीं होता…

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परिवार कभी पराया नहीं होता… प्‍यार कभी कम नहीं होता…

कई माता-पिताओं के बेटा/बेटी और परिवारों के ऐसे लाड़ले सदस्‍य होते हैं जो लेस्बियन(औरत से सैक्‍स करने वाली औरत), गे (आदमी से सैक्‍स करने वाला आदमी), बाईसेक्‍सुअल (दूसरे लिंग और समलिंगी दोनों से सैक्‍स करने वाला व्‍यक्ति) या ट्रांसजेंडर (लिंग बदलवाने वाला व्‍यक्ति) (एलजीबीटी) हैं। जब परिवार का कोई व्‍यक्ति कहता है कि वह ‘गे (आदमी से यौन-संबंध रखने वाली आदमी)’ है तो जाहिर-सी बात है कि परिवार के सदस्‍य उससे सवाल पूछेंगे। इन सवालों के जबाव देते हुए शुरुआती बातों के तौर पर, यहां कुछ महत्‍वपूर्ण तथ्‍य दिए गए हैं जिन्‍हें जानना ज़रूरी है:

  • लोग अपनी मर्जी से यह नहीं चुनते कि वे किसे प्‍यार करें या प्‍यार कैसे करें।

एलजीबीटी के तौर पर अपनी पहचान जाहिर करना, कोई अपनी मर्जी का मामला या एक्‍सीडेंट नहीं है। यह अमेरिका आने, बड़े शहरों में रहने, या एलजीबीटी दोस्‍त/सहेलियां बनाने की वजह से भी नहीं होता है। यूसीएलए स्‍कूल ऑफ लॉ के विलियम्‍स इंस्‍टीट्यूट के अनुसार, असल में, अमेरिका में एशियाई प्रशांत महाद्वीप की आबादी में से 3,25,000 या 2.8% लोगों की पहचान एलजीबीटी के तौर पर हुई है। ऐसी हालत में जबकि यह बात कोई भी पक्‍के तौर पर नहीं जानता कि सैक्‍स ओरियंटेशन (यौन रुझान) और लिंग पहचान किस तरह निश्चित होती है, ज़्यादातर एलजीबीटी लोग अपनी अलग स्थिति के बारे में कम उम्र में ही जान जाते हैं।

  • माता-पिता और उनके एलजीबीटी बच्‍चों ने कोई गलत काम नहीं किया

एलजीबीटी के माता-पिताओं में शुरू में कोई गलत काम करने और शर्मिंदगी का अहसास होता है लेकिन ऐसा नहीं है कि माता-पिता की वजह से उनके बच्‍चे एलजीबीटी बनते हैं। बच्‍चा जिस माहौल में बड़ा होता है उस माहौल से जुड़ी ऐसी कोई बात अभी तक मालूम नहीं हो सकी है जिसकी ”वजह” से कोई बच्‍चा एलजीबीटी बनता है। एलजीबीटी होने का सीधा मतलब है कि बच्‍चे की असली पहचान यही है। रिसर्च से पता चला है कि परिवार में इस पहचान को मानने से बच्‍चे की सेहत और भलाई को बढ़ावा मिलता है। परिवार के प्‍यार और मदद की बदौलत जोखिम पैदा करने वाले, खुद को नुकसान पहुंचाने वाले बर्ताव अपने-आप कम हो जाते हैं। इन बर्तावों में नशीले पदार्थ लेना, सेहत को नुकसान पहुंचाना और आत्‍महत्‍या के मामले शामिल हैं।

  • एलजीबीटी लोगों की जिंदगी खुशियों-भरी और कामयाब होती है

कई एलजीबीटी संतुष्‍ट और स्‍वस्‍थ जिंदगी जी सकते हैं। अमेरिका के साथ-साथ दुनिया बहुत तेज़ी से बदल रही है। कई राज्‍य और देश सेम सैक्‍स मैरिज (समान-लिंग वाले व्‍यक्ति से विवाह) को मान्‍यता दे रहे हैं। विलियम्‍स इंस्‍टीट्यूट ने पाया कि सेम सैक्‍स लोगों से संबंध रखने वाले 33,000 एएपीआई (एशियाई अमेरिकी व प्रशांत द्वीप वासी) लोगों में से 26% लोग बच्‍चों का पालन-पोषण कर रहे हैं। इसके अलावा, एलजीबीटी लोग सफल कॅरियर का आनंद भी उठाते हैं। कई व्‍यवसाय, कंपनियां, एजेंसियां और गैर-सरकारी संगठन अपने एलजीबीटी कर्मचारियों का खुलकर समर्थन करते हैं।

  • कई धर्म ”प्रगतिशील हो रहे हैं” और एलजीबीटी लोगों का पहले से ज़्यादा स्‍वागत हो रहा है

बहुत तेज़ी से, कई मत और धर्म एलजीबीटी लोगों का स्‍वागत करने के लिए बांहें फैलाकर आगे आ रहे हैं। एक खास समय के विचारों और संस्‍कृति दिखाने के लिए कुछ धर्मग्रंथों के हिस्‍से लिखे गए थे। कई संप्रदायों में अब यह माना जा रहा है कि एलजीबीटी लोगों को अपनाने का मतलब है बुनियादी धार्मिक और आध्‍यात्मिक मूल्‍यों पर जोर देना जैसे कि करुणा, प्रेम, दयालु ईश्‍वर और यह भरोसा बनाये रखना कि दूसरों के साथ हमें वैसा ही व्‍यवहार करना चाहिए जैसा हम अपने साथ होते हुए देखना चाहते हैं।

  • दुनिया को सभी के लिए एक बेहतर जगह बनाएं

कई राज्‍य और स्‍थानीय कानून एलजीबीटी लोगों की रक्षा करते हैं। इसके बावजूद, एलजीबीटी लोगों के साथ भेदभाव अभी भी जारी है। हमारी जिम्‍मेदारी है कि एक ऐसी दुनिया बनाई जाए जो भेदभाव से मुक्‍त हो, सुरक्षित हो और एक-दूसरे के लिए सम्‍मान से भरी हो चाहे किसी व्‍यक्ति की नस्‍ल, जातीयता, धर्म, प्राकृतिक मूल स्‍थान, अप्रवासी-स्थिति, यौन रुझान या लिंग पहचान कुछ भी हो।

  • स्‍वयं को और अन्‍य लोगों को शिक्षित करें।

आपकी मदद के लिए बहुत सारी जानकारी और संस्‍थाएं मौजूद हैं। पीएफ़एलएजी (ऐसे माता-पिता, परिवार और दोस्‍त जो अपने एलजीबीटी प्रियजनों की मदद करते हैं), नेशनल क्‍वीयर एशियन पैसिफिक आइलेंडर एलायंस (एनक्‍यूएपीआईए) और एशियन प्राइड प्रोजेक्‍ट जैसे समूह आप और आपके परिवार की मदद करने वाले समूह हैं। उनसे इन साइटों पर संपर्क करें  www.pflag.org, www.nqapia.org, www.asianprideproject.org.

याद रखिए आप अकेले नहीं हैं।

 

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